दही :आयुर्वेद के अनुसार दही की हर जानकारी विस्तार से जानें

दही का इतिहास

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  • प्राचीन भारतीय साहित्य में ‘क्षीर’ और ‘दध्ना’ शब्दों का उल्लेख है, जो दही की प्राकृतिक उत्पत्ति को दर्शाते हैं।
  • महाभारत और रामायण में भी दही का उल्लेख है, जहां यह आम भोजन के रूप में सेवित होती थी।
  • प्राचीन यूरोपीय और मध्य पूर्वी साहित्य में भी दही का उल्लेख है, जो उपचारिक और आहारिक उद्देश्यों के लिए उपयोग की जाती थी।
  • आधुनिक समय में, विभिन्न भागों में दुनिया भर में खाया जाता है और इसका खासतौर पर स्वास्थ्य लाभों के कारण महत्त्व है।
  • आज भी एक प्रमुख खाद्य पदार्थ है जो अनेक व्यंजनों में उपयोग किया जाता है और जनता की पसंद है।

दही खाने के फायदे आयुर्वेद के अनुसार

  1. आमाशय की स्वस्थता के लिए: दही में पाया जाने वाला प्रोबायोटिक्स आमाशय के अच्छे बैक्टीरिया को बढ़ावा देता है, जिससे पाचन प्रक्रिया सुधारती है और अपच समस्याएँ कम होती हैं।
  2. मजबूत श्वसन प्रणाली: दही में मौजूद पोषक तत्व श्वसन प्रणाली को मजबूत बनाते हैं और श्वसन संबंधित समस्याओं को कम करने में मदद करते हैं।
  3. अच्छा शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य: दही में पाए जाने वाले पोषक तत्व हमारे शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बनाए रखने में मदद करते हैं, जिससे हम ताजगी और ऊर्जा से भरपूर रहते हैं।
  4. प्राकृतिक शरीर का संतुलन: दही शरीर में पित्त को शांत करने में मदद करता है, जिससे शरीर का संतुलन बना रहता है और अन्य रोगों की संभावना कम होती है।
  5. रोग प्रतिरोधक शक्ति को बढ़ावा: दही में पाए जाने वाले प्रोबायोटिक्स हमारे रोग प्रतिरोधक प्रणाली को मजबूत करते हैं, जिससे हम बीमारियों के खिलाफ अधिक प्रतिरोधी बनते हैं।
  6. मानसिक तनाव को कम करना: दही में पाए जाने वाले तत्व दिमाग की सक्रियता को बढ़ाते हैं और मानसिक तनाव को कम करने में मदद करते हैं।
  7. त्वचा के लिए फायदेमंद: पाए जाने वाले पोषक तत्व त्वचा को स्वस्थ और चमकदार बनाए रखने में मदद करते हैं। यह चेहरे के अंशों को निखारता है और त्वचा को नरम और तरोताजा बनाए रखता है।

दही बनाने की प्रक्रिया

खासकर दूध के लैक्टिक एसिड बैक्टीरिया को काम में लेती है। यहाँ दही कैसे बनाई जाती है:

दही
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  1. दूध को उबालें: सबसे पहले, दूध को उबालकर उसका तापमान कम कर दें। आमतौर पर, दूध को उबालने के बाद उसको ठंडा करने तक छोड़ दें।
  2. स्थिर तापमान पर रखें: उबाले हुए दूध को स्थिर तापमान पर रखें, जो आमतौर पर लगभग 43-46 डिग्री सेल्सियस (110-115 डिग्री फ़ैरेनहाइट) होता है।
  3. दूध में दही बैक्टीरिया मिलाएं: अब, उबले हुए दूध में दही के प्रोबायोटिक बैक्टीरिया जैसे कि लैक्टोबैसिलस बैक्टेरिया को मिलाएं।
  4. उबाले हुए दूध को धीमी गर्मी पर रखें: अब, दूध को धीमी गर्मी पर रखें ताकि बैक्टीरिया दूध में आसानी से विकसित हो सके।
  5. धीमी गर्मी में धीरे-धीरे जमने दें: दूध को धीमी गर्मी पर रखकर उसे कुछ घंटों तक धीरे-धीरे जमने दें। इसके बाद, दही तैयार हो जाएगी।
  6. ठंडा करें और स्वादानुसार उपयोग करें: दही बनने के बाद, उसे ठंडा करें और फिर स्वादानुसार उपयोग करें। आप उसे सादा या अन्य व्यंजनों के साथ मिलाकर खा सकते हैं।

Dahi खाने से पाचन में लाभ

  • प्रोबायोटिक्स का स्रोत: दही में प्रोबायोटिक्स होते हैं, जैसे कि लैक्टोबेसिलस बैक्टेरिया और बिफिडोबैक्टेरिया, जो पाचन को सुधारने में मदद करते हैं।
  • आमाशय की स्वस्थता: दही में मौजूद प्रोबायोटिक्स आमाशय के स्वस्थ बैक्टीरिया को बढ़ावा देते हैं, जिससे खाने का सामग्री अधिक अच्छे से पाचन होता है।
दही
  • पाचन शक्ति को बढ़ावा: Dahi में पाया जाने वाला लैक्टोबेसिलस बैक्टेरिया पाचन शक्ति को मजबूत करता है, जिससे खाना अच्छे से पाचा जाता है।
  • अपच समस्याओं में सहायक: दही में मौजूद प्रोबायोटिक्स अपच जैसी समस्याओं को कम करने में मदद करते हैं, जैसे कि गैस, अपच, और पेट की खराबी।
  • पेट में संतुलन: दही खाने से पेट में अच्छे बैक्टीरिया का संतुलन बना रहता है, जिससे पेट स्वस्थ रहता है और पाचन प्रक्रिया सुधारती है।
  • पाचन शक्ति की सुधार: दही में मौजूद लैक्टोबेसिलस बैक्टेरिया खाने के प्रक्रिया को बेहतर बनाते हैं, जिससे खाना अच्छे से पाचा जाता है और वजन नियंत्रित रहता है।

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Dahi का प्रयोग

विभिन्न प्रकारों में किया जाता है और यह खाने के साथ-साथ विभिन्न पकवानों और उपायों में भी उपयोग किया जाता है। यहाँ कुछ प्रमुख तरीके हैं जिनमें दही का प्रयोग किया जाता है:

  1. रायता या सलाद: दही को रायता बनाने के लिए उपयोग किया जाता है, जिसमें विभिन्न सब्जियों को डाला जाता है। इसे मसालों के साथ मिलाकर या पुराने चावल के साथ परोसा जाता है।
  2. चटनी: Dahi को चटनी बनाने के लिए उपयोग किया जाता है, जो पकवानों के साथ सर्वनाश करने के लिए उपयुक्त होती है।
  3. लस्सी और छाछ: दही को लस्सी और छाछ बनाने के लिए उपयोग किया जाता है, जो गर्मी में शीतल dahi ki lashi aarogya junctionकरने वाले पेय होते हैं।
  4. कड़ी: दही को कड़ी बनाने के लिए उपयोग किया जाता है, जो चावल या पूरी के साथ उपभोग की जाती है।
  5. मिठाई: मीठे दही को शहद और फलों के साथ मिलाकर मिठाई बनाई जाती है, जैसे कि श्रीकंद, दही वड़ा, और मिठा दही।
  6. आइसक्रीम: दही को आइसक्रीम बनाने के लिए भी उपयोग किया जाता है, जो स्वादिष्ट और पौष्टिक विकल्प होता है।

इसके अलावा, पाकशालाओं में उपयोग किया जाता है और अनेक अन्य पकवानों में भी उपयोग किया जाता है, जिसमें उदाहरण के लिए ब्रेड पकोड़े, पूरी, और चाट शामिल हैं।

दही वड़ा बनाने की विधि

दही वड़ा एक प्रसिद्ध और पसंदीदा भारतीय स्नैक है जो उत्तर भारतीय खाने की सबसे प्रमुख विशेषताओं में से एक है।यह पारंपरिक तरीके से बनाया जाता है और भारतीय सामाजिक और पारंपरिक घटनाओं में अक्सर परोसा जाता है। इसका स्वाद हर किसी को मोह लेता है और इसे खाने का अनुभव एक अद्वितीय और रोमांचक होता है।

dahi ka vada दही

सामग्री:

  • उरद दाल – 1 कप
  • मूंग दाल – 1 कप
  • दही – 2 कप
  • खट्टा दही (तेल में भिगोने के लिए) – 1 कप
  • नमक – स्वादानुसार
  • हींग – 1/4 छोटी चमच
  • काली मिर्च – 1/2 छोटी चमच
  • अदरक-लहसुन का पेस्ट – 1 छोटी चमच
  • तेल – तलने के लिए

तैयारी की विधि:

  1. सबसे पहले, उरद दाल और मूंग दाल को अलग-अलग 4-5 घंटे के लिए पानी में भिगो दें।
  2. फिर, भिगी हुई दालों को चक्की में पीस लें या मिक्सर में पीस लें ताकि एक गारा बन जाए।
  3. बाटन में पीसी हुई दाल में नमक, हींग, काली मिर्च और अदरक-लहसुन का पेस्ट मिलाएं।
  4. दाल में इसे अच्छे से मिलाकर फेंक लें ताकि वह फूफा बन जाए।
  5. अब, वड़ों को बनाने के लिए एक छोटे पतीले में तेल गरम करें।
  6. तेल गरम होने पर, चमच की मदद से दाल का मिश्रण निकालकर उसे हथेलियों में ले और गोलाकार वड़े बनाएं।
  7. तेल में बने वड़े को मध्यम आंच पर सुनहरे रंग के होने तक तलें।
  8. तले हुए वड़े को निकालकर पानी में थोड़ी देर के लिए डालें, फिर उन्हें निकालें और हल्का सा दबाकर पानी निकाल दें।
  9. दही में थोड़ी सी नमक मिलाएं और उसे वड़ों पर डालें।
  10. तैयार होने पर, ऊपर से थोड़ी सी काली मिर्च और नमक छिड़कें।
  11. दही वड़ा तैयार है, इसे ठंडा करके परोसें।

दही पुरी बनाने की विधि

सामग्री:

  • पुरी (पानी पूरी) – 20-25 टुकड़े
  • सफेद मटर (कोई भी तरीके से पके हुए) – 1/2 कप
  • आलू (उबले हुए और कटे हुए) – 1/2 कप
  • Dahi(ठंडा) – 1 कप
  • सेव (बारीक कटी हुई) – 1/2 कप
  • हरा धनिया-पुदीना चटनी – स्वादानुसार
  • इमली की मीठी चटनी – स्वादानुसार
  • नमक – स्वादानुसार
  • लाल मसाला – स्वादानुसार
  • काली मसाला – स्वादानुसार
  • चाट मसाला – स्वादानुसार
  • नींबू का रस – 1 चमच

तैयारी की विधि:

  1. पहले, पुरी के ऊपर एक छोटी छेद करें ताकि उसमें भरने के लिए जगह बन जाए।
  2. अब, प्रत्येक पुरी में थोड़ा-थोड़ा उबले हुए आलू, सफेद मटर, हरा धनिया-पुदीना चटनी, इमली की मीठी चटनी और दहीडालें।
  3. फिर, सेव, लाल मसाला, काली मसाला, चाट मसाला, नमक, और नींबू का रस डालें।
  4. ध्यान दें कि पुरी को जल्दी न भिगोएं, वरना वह नरम हो जाएगा।
  5. तैयार होने पर, पुरी को सर्व करें।

आपकी स्वादिष्ट और पौष्टिक दही पुरी तैयार है!

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